मित्रो, सबसे पहले में अपने
विचारों के साथ कुछ लिखू उससे पहले देरी जो हुई उसकी क्षमा चाहुंगा।
मित्रो, आज जब में समाज में चल
रहे स्त्रियों के कल्याण कार्यक्रम, स्त्रियों को सशक्त
बनाने की योजनायें यह सब देखता हूँ और सुनता हूँ तो आनंद जरूर होता है परंतु
आश्चर्य भी होता है।
क्यूं आज हम स्त्रियों
को अबला बनाने का प्रयास करते हैं जब कि अपने आप में सबसे सामर्थ्यवान स्त्री है।
स्त्री की सहज शक्ति को देखने कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। हम हमारे घर में भी
हमारी माँ और बहन और पत्नी या बेटी की समर्थता, सातत्य देखकर समझ सकते
हैं।
मित्रो, हम हमारे इतिहास को
देखे तो भी स्त्री की शक्ति को हम समझ सकते हैं। स्त्री की शक्ति हम सावित्री जी
की बात से ठीक से समझ पायेंगे।
जब सावित्री सत्यवान
को विवाह के लिए वरण करती है तब मुनि नारद जी द्वारा उसे अवगत कराया जाता है कि
ठीक एक साल के बाद सत्यवान की मृत्यु हो जाएगी फिर भी अपने तप पर एवं पतिव्रत धर्म
के बल पर सावित्री यमराज से अपने पति के प्राण सहित अपने घर की सुख शांति एवं
समृद्धि सिर्फ अपने पति के घर की ही नहीं बल्कि पिता के घर की समृद्धि भी ले आती
है।
काल के मुंह से खींचकर
जो अपने पति के प्राण ला सकती है वो स्त्री कैसे अबला हो सकती है?
मित्रो और आगे बढ़े तो
माता अनसुया अपने द्वार पर आए हुए त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश को शिशु बनाकर अपना
स्तनपान कराती है और पालने में सुलाती है। त्रिदेव को मुक्त करने के बदले में समाज
को गुरू दत्तात्रेय जैसे महान ज्ञानी की प्राप्ति कराती है। मित्रो आज भी जब हम
माँ दुर्गा के स्वरूप को देखते है तब एक ही स्वरूप दिखता है और वो है महिषासुर
मर्दीनी स्वरूप माँ के आयुध भी कल्याणकारी एवं समाज उत्थान का संदेश देने वाले
हैं।
जिस समाज में स्त्री
को माँ दुर्गा स्वरूप माना जाता है ऐसी स्त्री अबला कभी नहीं हो सकती।
शक्ति
तभी प्रकट होती है जब उसकी समाज को जरूरत हो। इसीलिए आज भी हमारी स्त्रियां
अनेकविध क्षेत्रों में आगे बढ़ चुकी हैं।
हमें कभी भी ये नहीं
भूलना चाहिए कि श्री राम एवं श्री कृष्ण को पृथ्वी पर जन्म देने वाली भी एक स्त्री
ही है। उसे अबला बनाकर कभी भी शक्ति को दबाना नहीं चाहिए।
मित्रो हमें कभी भी यह
नहीं भूलना चाहिए जब चन्ड-मुण्ड, शुम्भ निशुम्भ, रक्तबीज महिषासुर जैसे
अति भयंकर राक्षसों ने देवताओं को परास्त कर दिया।
स्वयं भगवान विष्णुको
परास्त कर दिया तब भगवती ने बाला स्वरूप घारण किया और राक्षसों का संहार किया।
मित्रो यह कथा हमें आज के युग में यह ज्ञात कराती है कि जब-जब समाज ऐसे राक्षस
वृति वाले लोगों को जन्म देगा तब-तब माँ भगवती स्वरूपा स्त्री तत्परता से उसका
संहार करेगी।
हमारे शास्त्रों ने भी
स्त्री के स्त्रैण को उसकी अस्मीता को उसकी शक्ति को हमेशा वंदन किया है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र
देवताः।
यत्रैता न तू पूज्यन्ते सर्वत्राफलाः
क्रिया।।
स्त्री पहले भी शक्ति
थी। आज भी शक्ति है और हमेशा शक्ति ही रहेगी। प्रकृति के बिना पुरूष की कल्पना हो
ही नहीं सकती इसीलिए में भगवान शंकर के अर्धनारेश्वर स्वरूप को याद कराना चाहूँगा।
जिन्होंने यह दर्शन कराया है कि यदि शक्ति है तभी शिव है बिना शक्ति के तो शिव भी ‘‘शव’’ है।
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण
संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
‘‘यह समग्र लेख भगवती
पराम्बा के चरणों में समर्पित’’


3 comments:
Superb and nice thought krupalji
Great...keep it up ..
Beautiful
Post a Comment