Thursday, 25 August 2016

श्री पूर्णावतार श्री कृष्णा



मित्रों सबसे पहले पूर्ण पुरुषोत्तम श्री कृष्ण के अवतरण दिवस की ढेरों शुभकामनाएं | आज ये विषय जिसके सन्दर्भ में कुछ लिखने जा रहा हूँ मैं मानता हूँ की मुझे लिखने का सामर्थ्य श्री कृष्ण ही प्रदान करें |
मित्रों हम कृष्ण जन्म की कथा के लिए महर्षि वेदव्यास रचित एवं भगवान नारायण के वाग्मय स्वरुप श्रीमद भागवत की ओर चलते है |
          पहले मैं इसकी पृष्ठभूमि के लिए श्रीमद भागवत जी के स्वरुप की बात करना चाहूँगा | श्रीमद भागवत भगवान श्री कृष्ण का संपूर्ण स्वरुप है | प्रथम स्कंध से लेकर बारहवें स्कंध तक भगवान का संपूर्ण स्वरुप है | भगवान राम का अवतरण रामचरित मानस में बालकाण्ड में ही हो जाता है जब कि भगवान श्री कृष्ण का अवतरण नो स्कंध के बाद दशवें स्कंध में होता है | उसके मर्म को समझने का प्रयास करें तो जब तक साधक परिपूर्ण नहीं हो तब तक पूर्ण पुरुषोत्तम की प्राप्ति संभव नहीं है | नवधा भक्ति से परिपूर्ण साधक या तो नव मास की भक्ति रुपी सगर्भावस्था ये दोनों चीजें साधक को परिपक्व बनाती है साथ ही देखें तो दशमस्कंध श्रीमद भागवत का ह्रदय है और भगवान ह्रदय में प्रगट होते है | जब तक ह्रदय वेणु के समान खाली नहीं होता तब तक भगवान श्री कृष्ण उसे स्वीकार नहीं करते भागवत में वेणु गीत के द्वारा गोपियों ने भगवान की सुंदर स्तुति करी है|
          वेणु प्रभु को प्रिय क्यूँ है उसको यदी समझा जाएँ तो वेणु में कोई रूकावट नहीं है कोई रोध नहीं है | कोई कपट मन में नहीं रहता मन वेणु की तरह निर्मल एवं मधुर होता है तभी भगवान के अधरों की प्राप्ति होती है और मधुर स्वरगान बजता है |

          जब पृथ्वी पर पाप बढ़ा पाप के भार से भारी पृथ्वी गौ का स्वरूप लेकर देवताओं के पास जाती है| जब हमारा मन भी पाप के किसी बोझ से भारी लगे तो हमें गौ अर्थात हमारी इन्द्रियों को अंतर्मुख करके अपने ह्रदय में स्थित परमात्मा का ध्यान करना चाहिए और तभी जो आवाज आत्मदेव से आती है वो ही आकाशवाणी है वो ही प्रभु की वाणी  है |
          भगवान ने सान्तवना देते हुए कहा की मैं पृथ्वी पर भुपराग और भू – पराग हरने आऊंगा |
यहाँ दो शब्द है भू – पराग और भूप राग उसका अर्थ ये है कि भगवान पृथ्वी के बोझ का मतलब पाप को हरेंगे और राजाओं के  मिथ्याभिमान को नष्ट करेंगे |
मित्रों यह कथा की चर्चा करने का मेरा यह उद्देश्य भी है कि भूप राग नष्ट हो | आज भी हमारी पृथ्वी ऐसे भार से आतंकित है |
प्रभु का व्यवहार देखे तो सबको साथ में लेकर चलते है | भगवान चन्द्र वंश में प्रगट हो रहे थे इसीलिए चन्द्रमा की पत्नी रोहिणी एवं वासुदेव जी की पत्नी रोहिणी है भगवान रोहिणी नक्षत्र में प्रगट हुए मध्य रात्रि में प्रगट हुए भगवान के आने से पूर्व भक्त को माया का सामना करना है इसीलिए भगवान श्रीमद भगवद्गीता में कहते है की जो मुझे मेरी माया से परे जानता है वोही मुझे प्राप्त कर सकता है |
पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण के बारे में जीतना कहा जाये कम है |

“असितगिरी समं  स्यात कज्जलं सिन्धु पात्रे सुरतरुवरशाखा लेखनी पत्रमुर्वी |
लिखती यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं तदपि तव गुणानामिश पारं न याति  ||”

हे इश्वर आपकी गर्भस्तुति द्वारा सभी देवताओं ने आपकी हर लीलाओं को सत्यवर्णित किया है आप सम्पूर्ण सत्य हो आप पूर्ण पुरुषोत्तम हो आपके चरणों में कोटि कोटि वंदन|

“सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादी हेतवे |
तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नुम: ||”

सत्य स्वरुप तीनो ताप को नाश करने वाले श्री कृष्ण आपको श्री राधा जी सहित प्रणाम करता हूँ |
आओ मिलकर प्रभु से प्रार्थना करे की हे पुश्निगर्भ हे उपेन्द्र हे पुराणपुरुषोत्तम फिर एक बार आपके अवतरण की ज़रूरत हे....

                                                    जय श्री कृष्णा   

2 comments:

Unknown said...

Jai Shree Krishna

Unknown said...

Jai Shree Krishna

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