Saturday, 9 January 2016

“लक्ष्मण रेखा”





नमस्कार मित्रो एक नए विषय के साथ आज फिर मिलना हो रहा है, लक्ष्मण रेखा प्रसंग से कुछ बात करना चाहता हूँ |
      अरण्य कांड में जब माता सीता का हरण करने हेतु रावण मारीच को मायावी मृग बनकर श्री राम जी और लक्ष्मण जी को दूर ले जाने की बात करता है तब बहुत तर्क वितर्क के बाद अपना उद्धार श्री राम के हाथों से करवाने हेतु इस प्रस्ताव को मारीच स्वीकार कर लेता है और उस प्रकार से अपना स्वरुप बदल कर स्वर्ण मृग बनता है |
      माता सीता उसे पाने हेतु श्री रामजी को अनुरोध करते है और श्री रामजी मृग के पीछे जाते है, जब दूर जाकर मृग को अपने तीक्षण बाण से भेदते है तब बहुत ही बड़ी आवाज में ‘लक्ष्मण’ करके मारीच आवाज लगाता है आवाज सुनकर माँ सीता जी व्यथित हो जाते हें और लक्ष्मण जी को उनकी रक्षा हेतु भेजते है | जब लक्ष्मण जी वहां से निकलते है तब प्रभु श्री राम का स्मरण करके अपने बाण से एक रेखा खींचते है (उसी रेखा को लक्ष्मण रेखा अंकित किया गया है) यहीं से हमारी बात शुरू होती है |
      यहाँ श्री लक्ष्मण जी रेखा खींचते हुए माँ सीता को कहते है कि माता इस रेखा के भीतर कोई नहीं आ पायेगा, पर आप कहीं भी जा पाएंगी किन्तु कृपया जब तक हम न आएं आप इस रेखा का उलंघन मत कीजीयेगा | रावण उसी वक्त सन्यासी स्वरुप में आता है और माँ उनको भिक्षा देने हेतु उस रेखा का उल्लंघन करते हे तब सन्यासी रूप में आए हुए  उस भेडिये रावण को अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त होती है यहां महाबली रावण के लिए गोस्वामी जी ने भेडिये शब्द का प्रयोग बहुत सोचकर किया है |

सो दससीस स्वान की नाई | इत उत चितइ चला भड़ीहाई||
इमि कुपंथ पग देत खगेसा | रह न तेज तन बुधि बल लेसा ||

      मेरा उद्देश्य सिर्फ श्री रामचरित मानस की कहानी सुनाना नहीं है | किन्तु यह मानस समाज जीवन से कितना जुड़ा है और कितना दूरदर्शी विचार रखताहै यह दिखाना है | गोस्वामी जी इस प्रसंग में आज के परिपेक्ष्य में यह कहना चाहते है कि रावण रूपी भेड़िया आज भी हमारे समाज में मौजूद है आज एक नहीं ऐसे अनेक रावण सीता माता का हरण करने उन्हें पतित करने घूम रहे है |
      तभी यह लक्ष्मण रेखा का अर्थ समझना जरुरी बनता है | लक्ष्मण रेखा सही में हमारी मर्यादा को दर्शाती है जब-जब हमारी मर्यादा एक रेखा का उलंघन करती है तब – तब ऐसे भेडियों को अपना स्वरुप दिखाने का अवसर मिलता है |
      लक्ष्मण जी यहाँ पर भी यही बात कहते है की इस रेखा के भीतर कोई नहीं आ पायेगा | आज हमारे समाज को भी स्वयं अपनी लक्ष्मण रेखा तय करनी होगी, में इससे किसी स्वंत्रता पर रोक करने की बात कभी नहीं कर रहा हूँ परन्तु मेरा उद्देश्य यह है की एक मर्यादा की रेखा को पार करने से माता सीता भी अपने आप को हरण होने से नहीं बचा पाई थी |
      तो फिर क्यूँ हम यह बात अपने जीवन में चरितार्थ नहीं कर सकते हमें किसी लक्ष्मण की जरुरत नहीं है कि जो हमें सुचितार्थ करे कि यह रेखा है परन्तु अपने आप को समझकर हमें खुद हमारी रेखा तय करनी होगी इन भेडियों से बचने के लिए उन्हें अपनी रेखा में रखना होगा तभी कलियुग के रावणों से हमारी रक्षा होगी |
      लक्ष्मण रेखा को सही अर्थ में समझकर हमें अपने जीवन की लक्ष्मण रेखा तय करनी होगी और रावण को मात देनी होगी |
और विचारों के साथ मिलते रहेंगे
      “जय श्री राम”         


3 comments:

Unknown said...

सुंदर सुंदर सुंदर भाई

Unknown said...

सुंदर सुंदर सुंदर भाई

Unknown said...

जय श्री राम

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