Tuesday, 5 January 2016

‘’अहल्या’’




अहल्या शब्द सुनते ही हमारे मन में रामायण स्फुरित होता है | मुझे आज यह कहते हुए गर्व है कि मुझे ऐसे विद्वान आचार्य की संस्कृति मिली है जो की हर एक बात को आध्यात्मिक और यौगिक रूप से समझाकर समाज जीवन को कैसे उन्नत किया  जाए उसकी चिंता में शायद चिंता शब्द उचित नहीं है क्यूंकि यदि चिंता होती तो परिणाम नहीं होता इसलिए चिंतन शब्द का प्रयोग उचित रहेगा |

     5000 वर्ष पूर्व का चिंतन कितना उच्च परिणाम दर्शक था जो आज भी हमें प्रेरणा देता रहता है |

गौतम नारी श्राप बस उपल देह धरि धीर |
चरण कमल रज चाहती कृपा करहु रघुबीर ||
                          (संदर्भ श्रीरामचरित मानस) 
     
     कौन थी अहल्या ? क्या थी अहल्या ? क्यूँ अहल्या उपल देह थी ? क्या सही में अहल्या उपल मतलब पत्थर की थी ? ऐसी स्थिति दर्शाकर गोस्वामी जी कुछ और ही कहना चाहते है | यही रामायण के इस प्रसंग को सिर्फ श्रद्धाभाव से पूछा जाए या वर्णन किया जाए तो यही समज में आएगा कि अहल्या ऋषि गौतम के श्राप से  अपने ही आश्रम में पत्थर की मूर्ति बन गई थी जिसको प्रभु श्री राम ने चरणस्पर्श करा के सजीवन मतलब पुनरुद्धार किया और श्री राम जी की दिव्य लीला का दर्शन होगा और यह प्रसंग समापन हो जायेगा तो क्या इस प्रसंग से हम इतना ही दर्शन करेंगे सही अर्थ में ऐसा ही होना था तो प्रभु श्री राम का अवतार लेकर मर्यादापूर्ण जीवन जीकर सन्देश देने का जो प्रयास है वो विफल हो जायेगा |
     यदी आज की परिपेक्ष्य में देखे तो ‘’अहल्या’’ कोई एक नारी नहीं है परन्तु बहुत सारी अहल्या का समूह है जो आज भी हमारे द्वारा कहे जाने वाले विद्वान  चिंतको द्वारा या प्रतिष्ठित लोगों द्वारा उपेक्षित है |

     यदी उसकाल में जब की तब एक मर्यादा का विचार अस्तित्व में था तब मेरे प्रभु श्री राम द्वारा अहल्या का स्वीकार होता है सिर्फ स्वीकार नहीं क्यूंकि श्रीराम स्वीकार करके रुकते नहीं है उनको पद देते है पद देकर सम्मानित करते है |

आज यह क्यूँ संभव नहीं है ? क्यूँ आज समाज इतना शक्तिशाली नहीं है जो ‘’अहल्या’’ को पद दे सके यथायोग्य सम्मान दे सके ? यदी सही अर्थ में गोस्वामी जी को सार्थक करना है उनके सन्देश को रामचरित मानस को सार्थक करना है तो हर समाज में से राम को आज आना पड़ेगा और ऐसी बहुत सारी ‘’अहल्या’’ को पद देना पड़ेगा तभी श्री राम चरित मानस की यह पंक्ति सार्थक होगी |


‘’और विचारों के साथ मिलते रहेंगे‘’
                                                               ‘’जय श्री राम”

8 comments:

Unknown said...

Superb! !

kumarmitendra said...

बहुत सूंदर भाई

kumarmitendra said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Unknown said...

Wah jiju superb

Unknown said...

Wah jiju superb

Anjanesh Kumar said...

Good to Go ! ...... Be Continue Sir .... We are waiting for your Next Post.

Unknown said...

बहुत अच्छे विचार

Unknown said...

बहुत अच्छे विचार

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